"छोटी सी कहानी "

 शीशा-एक प्रेरणादायक कथा की छोटी कहानी | तो आइये दोस्तों अपनी आज के कहानी पर चर्चा शुरू करते हैं और आगे आने वाले ऐसे ही छोटी प्रेरणा दायक कहानी के लिए मुझे फॉलो करते रहे !!!!



तो शीर्षक से आप लोगो को ज्ञात हो ही गया होगा की ये जो कहानी मैं सुनाने जा रही हूँ वह हमारे जीवन के सबसे खास चीज़ हैं जिससे हम कभी न कभी अपने आपको निहारते रहते हैं | चाहे वो सजने की बात हो या किसी और अच्छी जगह जाने की सज धज के !!!

जिंदगी में बहुत सारे पड़ाव आते हैं कभी खुसी आती हैं तो कभी गम आता हैं | पर सफल वही  बनते जो अपने ऊपर विश्वास रखते हैं और आत्मचिंतन करते हैं की उन्हें और अपने  किस चीज़ में ध्यान देने के आवश्यकता हैं| हमारे आस पास बहुत सारी चीज़ें रहती हैं जिससे हम प्रेरणा ले सकते हैं और जिंदगी में कोई भी मनचाहा मुकाम हासिल कर सकते हैं |  

जी हां आप सब सही सोच रहे हैं मैं बात कर रही हूँ शीशा की जो आपके दैनिक लाइफ में अकसर बहुत जगह काम आता हैं पर सायद कुछ लोगो को इसका असल उपयोग जानने में कुछ वक़्त लग सकता हैं तो इसी के सन्दर्भ में जानतें हैं सबसे पहले की शीशा  का असली अर्थ क्या होता हैं ?


शीशा क्या होता हैं ?

तो शीशा को हम कई नाम से जानते हैं जैसे की मिरर ,आयना या फिर दर्पण | कहना का मतलब ये हैं की एक ऐसा वस्तु  जो हमें अपनी असली पहचान से अवगत कराता हैं | इसे देखने से हर कोई को खुसी मिलती हैं तो बहुतो को गम भी होता हैं क्योकि उनका अक्स या उनकी चहरे की बनावट अच्छी नहीं हैं इसलिए | 

पर शीशा आप लोगो को आपकी असली पहचान से रूबरू करता हैं जो हमारे असल जिंदगी में बहुत ही  महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं | शीशा को निहारने का मतलब ही यही होता हैं की अपने भीतर के गुणों को निखारना और अंदर के अवगुणो को हमेशा के लिए समाप्त कर देना | 

आज कल लोग बाहरी सुंदरता पैन मोहित हो जातें हैं | जिसकी वजह से आंतरिक सुंदरता का मोल काम होता जा रहा हैं और लोग भी ऐसे ही होते जा रहे हैं की अगर हम सुन्दर हैं तब जाके लोग हमसे प्रभावित होंगे या फिर हमसे बात करेंगे | 

पर नहीं दोस्तों यह सारी बातें बहुत ज्यादा गलत हैं की आप भी इसी प्रवाह में बहते जा रहे हैं | आप अपने अक्स में बहुत सारे बदलाव ला सकते  जैसे की आप मीठा बोल सकते हैं ,किसी को आप अच्छे विचार दे सकते हैं और इत्यादि |  

तो चलिए शुरू करते हैं अपनी प्रेरणा दायक छोटी सी कहानी जिसका शीर्षक हैं शीशा !!!!!!



 शीशा-"एक प्रेरणादायक कथा " की छोटी कहानी !!!!

तो ये बात हैं बहुत ज़माने पहले की !!जब हर जगह हरियाली थी खुसी की सौगात थी और कहानियों के जैसे जादुई शीशा ,जादुई महल और बहुत कुछ जादुई था | वहाँ पैन एक राजा का शाशन था जो बहुत ही दयालु स्वाभाव के थे | उनके दो पुत्र थे दोनों ही जुड़वाँ थे और अक्स में भी दोनों ही सुन्दर थे | पिता दोनों पुत्रों से बहुत प्यार किया करते थे | 

पर समस्या ये थे की राजा अपना आने वाला उत्तराधिकारी किसे बनाएं ???? क्योकि दोनों ही जुड़वाँ थे और मनमोहक अक्स था | पहले का नाम था अभिनव और दूसरे का नाम था सभीनव | 

अब अभिनव का स्वाभाव बहुत ही विनम्र था और सभिनाव का बहुत की चिड़चिड़ा था | पिता जानतें थे की अभिनव ही आने वाले राज्य का वारिस हैं पर अगर पिता ऐसे करते तो सभीनव नाराज़ हो जाता इसलिए उसे समझाने के लिए पिता को दोनों की परीक्षा लेनी पड़ी | 

तो पिता ने फैसला किया की दोनों बच्चो की परीक्षा जाएं | तो उन्होंने ये कहा की दोनों बच्चो को एक महीने तक जंगल में रहना पड़ेगा अपनी पहचान छुपाएं हुए | अब दोनों बच्चे पिता के कहे अनुसार निकल पड़ते हैं जंगल के लिए| 

अब दोनों भाई जंगल पहुंचते हैं और किसी तूफ़ान के वजह से भिचड जाते हैं | अब अभिनव तो एक बुढ़िया की कुटिया में पंहुचा जो कुछ ज्यादा उम्र रहते ही थोड़ी सी चिड़चिड़ी हो गयी थी पर अभिनव के स्वाभाव ने उसे एक महीने के अंदर खुशहाल बना दिया था | 

और दूसरी तरफ सभीनव के स्वाभाव के कारण एक खुशहाल तथा संतुष्ट गरीब भी दुखी होगया | 

जब दोनों भाई एक महीने के अंदर राज्य वापस आये तो उनके पिता ने उनको उनके किये हुए कर्मों को जादुई शीशा में दिखाया | जिससे सभीनव समझ गया की सिर्फ चेहरा ही अच्छा होना ही ठीक नहीं हैं वरन स्वाभाव, सादगी और सज्जनता होना भी उतना ही आवश्यक हैं | 

तो देखा दोस्तों आपने देखा की कैसे अभिनव ने एक चिड़चिड़ी बुढ़िया को बदल दिया और वो कैसे ?उसने उनकी हर बात मानी यह बात उसके आदर भाव को समझाता हैं ,वह छोटी सी कुटिया में रहने के लिए मान गया कैसे ?क्योकि उसके अंदर हर परिस्तिथि से लड़ने की छमता हैं | 

वह बुढ़िया का मन कैसे जीत पाया क्योकि उसके अंदर निस्वार्थ भावना थी उसे किसी बात का मोह नहीं था | और दूसरी तरफ सभिनव उससे भिन्न था कैसे ?क्योकि उसने न तो किसान की मदद की | और वह मुफ्त की रोटी तोड़ना चाहता था इससे क्या पता चलता  हैं उसके स्वाभाव के बारें में ?

की वो एक नंबर का कामचोर था | और जो खुद श्रम नहीं करता वो इत्ते बड़े राज्य को क्या सम्हालेगा | और किसान के घर रहकर उसी से लड़ाई कर रहा था इससे क्या पता चलता हैं ? की वो बिलकुल भी मिलनसार नहीं था और जो लोग के साथ मिलनसार नहीं होगा वह राज्य के लोगों का क्या भला करेगा |


 

तो इससे ये पता चलता हैं की अभिनव की सही शाशक बन सकता था क्योकि उसमें वो सारे गुण थे जो एक राजा में होने चाहिए | ऐसे ही पथप्रदर्शक कहानियों के लिए नीचे दबाएं 👇👇👇👇👇👇

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आशा हैं आप सभी को मेरी ये कहानी पसंद आयी होगी!!!.......



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